Virat Kohli फिर भी अकेले खड़े रहे ' 3rd ODI में शतक, लेकिन हार के बाद छलका दर्द जाने कैसे |

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 आज मैच हुआ है इंदौर के होलकर स्टेडियम में खेले गए भारत बनाम न्यूज़ीलैंड के तीसरे वनडे मुकाबले में एक बार फिर सबकी निगाहें Virat Kohli पर टिक गईं। लेकिन बड़ा लक्ष्य, भारी दबाव और सामने मजबूत विरोधी टीम लेकिन इन सबके बीच कोहली वही करते नजर आए, 


Virat Kohli फिर भी अकेले खड़े रहे ' 3rd ODI में शतक, लेकिन हार के बाद छलका दर्द जाने कैसे |


जो उन्होंने पहले अपने करियर में अनगिनत बार किया है जो अपने टीम के लिए आख़िरी दम तक लड़ना और मैच को जितना इनके लिए कोई भरी बात नहीं है लेकिन फिर भी आज कुछ ही मिनट में मैच इंडिया को हार ना पड़ा ।


IND vs NZ 3rd ODI ' जब उम्मीद सिर्फ Virat Kohli पर टिकी थी


New Zealand ने पहले बल्लेबाज़ी करते हुए भारत के सामने 337 रनों का पहाड़ जैसा लक्ष्य रखा। स्कोरबोर्ड साफ बता रहा था कि यह मैच आसान नहीं होने वाला। भारतीय पारी की शुरुआत लड़खड़ाई और शुरुआती विकेट जल्दी गिर गए। ऐसे समय में स्टेडियम में बैठे दर्शकों और टीवी के सामने बैठे करोड़ों फैंस की उम्मीदें एक ही नाम से जुड़ गईं - Virat Kohli।


क्रीज पर Kohli, तो मुकाबला जिंदा


Virat Kohli ने आते ही हालात को समझा। उन्होंने जल्दबाज़ी नहीं दिखाई और हर गेंद को सम्मान दिया। रन भले धीरे-धीरे आ रहे थे, लेकिन उनकी आंखों में साफ दिख रहा था कि वे इस लक्ष्य का पीछा करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

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जैसे-जैसे पारी आगे बढ़ी, कोहली का आत्मविश्वास भी बढ़ता चला गया। कवर ड्राइव, स्ट्रेट ड्राइव और गैप में निकाले गए शॉट्स ने दर्शकों को फिर से उत्साहित कर दिया। यह वही Kohli थे, जिन्हें क्रिकेट फैंस सालों से देखते और सराहते आए हैं।



54वां ODI शतक: आंकड़ा नहीं, जज़्बे की कहानी

Virat Kohli का यादगार शतक

जब Virat Kohli ने अपना 54वां ODI शतक पूरा किया, तो पूरा स्टेडियम तालियों की गूंज से भर उठा। यह शतक सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं था, बल्कि उस खिलाड़ी की मानसिक मजबूती का प्रतीक था, जो दबाव में और भी निखर कर सामने आता है।


Virat Kohli फिर भी अकेले खड़े रहे ' 3rd ODI में शतक, लेकिन हार के बाद छलका दर्द जाने कैसे |


यह पारी इस बात का सबूत थी कि उम्र या फॉर्म पर सवाल उठाने वाले कितने भी हों, बड़े मैचों में Kohli आज भी टीम इंडिया की सबसे बड़ी उम्मीद हैं।


दुर्भाग्य: साथ नहीं मिला, मुकाबला हाथ से निकला


Virat Kohli एक छोर से टिके रहे, लेकिन दूसरे छोर से विकेट गिरते रहे। इस बड़े लक्ष्य का पीछा करने के लिए जिस साझेदारी की ज़रूरत थी, वह नहीं बन पाई। रन रेट का दबाव बढ़ता चला गया और अंत में भारतीय टीम 41 रन से मैच हार गई।


हार के बाद Kohli का चेहरा बहुत कुछ कह रहा था। शतक के बावजूद जीत न मिल पाने का दर्द उनकी आंखों में साफ झलक रहा था। यह वही खिलाड़ी है, जिसके लिए व्यक्तिगत उपलब्धियां कभी भी टीम की जीत से बड़ी नहीं रहीं।


फैंस की प्रतिक्रिया: “Kohli ने अकेले लड़ाई लड़ी”


मैच खत्म होते ही सोशल मीडिया पर एक ही चर्चा छा गई। फैंस ने Virat Kohli की पारी की जमकर तारीफ की और यह भी कहा कि हर मैच में उनसे अकेले चमत्कार की उम्मीद करना सही नहीं है।


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लोगों का मानना है कि अगर बाकी बल्लेबाज़ थोड़ा भी साथ देते, तो यह मैच पूरी तरह भारत के पक्ष में जा सकता था।


Virat Kohli आज भी टीम इंडिया की सबसे बड़ी ताकत


इस मुकाबले ने एक बात फिर साफ कर दी — Virat Kohli आज भी भारतीय क्रिकेट की रीढ़ हैं। जब हालात मुश्किल होते हैं, तब वही खिलाड़ी सबसे आगे खड़ा दिखाई देता है। हार के बावजूद यह पारी लंबे समय तक याद रखी जाएगी, क्योंकि इसमें सिर्फ रन नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और जज़्बा झलकता है।


आगे क्या? Kohli के साथ टीम को भी उठानी होगी जिम्मेदारी


आने वाले मैचों में टीम इंडिया को Virat Kohli के इस संघर्ष से सीख लेनी होगी। अगर बाकी बल्लेबाज़ भी इसी तरह जिम्मेदारी लें, तो वही Kohli फिर से भारत के लिए जीत की कहानी लिख सकते हैं।


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